महात्मा गांधी ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पर स्थित वाल्मीकि मंदिर में 1946-47 के दौरान वाल्मीकि समुदाय के बच्चों और बड़ों को पढ़ाया। उनकी पाठशाला करीब 30 से 75 छात्रों तक पहुंची। इससे पहले 1939 में उन्होंने बिड़ला मंदिर का उद्घाटन किया, जो सभी जातियों के लिए खुला था। दोनों प्रयासों से गांधीजी ने अस्पृश्यता और जातिवाद के खिलाफ शिक्षा और समानता का संदेश दिया।
गांधीजी की वाल्मीकि मंदिर पाठशाला: शिक्षा से छुआछूत मिटाने का संदेश
Source: Dainik Tribune Hindi