भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यबोध की मिसाल है। 2 अक्तूबर 1904 को मुगलसराय में जन्मे शास्त्रीजी ने रेल मंत्री रहते हुए दो रेल दुर्घटनाओं की नैतिक जवाबदेही लेकर इस्तीफा दिया। मई 1964 में नेहरू के निधन के बाद प्रधानमंत्री बने, पर उन्होंने कार खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लिया, जिसे पत्नी ललिता शास्त्री ने पेंशन से चुकाया।
शास्त्रीजी की सादगी और नैतिकता की विरासत
Source: Lokmat Hindi