केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में फ़ारस की खाड़ी के अरब देशों ने होर्मुज़ स्ट्रेट से बचकर वैकल्पिक मार्गों से अपना तेल निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर पर पहुंचा दिया, जबकि अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान का निर्यात लगभग शून्य है। होर्मुज़ से होकर जाने वाले तेल की हिस्सेदारी घटी और पाइपलाइनों का इस्तेमाल बढ़ा। विश्लेषकों के मुताबिक़, ईरान की "स्मार्ट कंट्रोल" रणनीति अब भी जोखिम बनाए हुए है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान का नियंत्रण कमज़ोर, अरब देशों का निर्यात बढ़ा
Source: BBC Hindi