8 अक्टूबर 1967 को चे ग्वेरा बोलीविया में पकड़े गए और अगले दिन उन्हें मार दिया गया। फिदेल कास्त्रो के साथ क्यूबा की क्रांति में अहम भूमिका निभाने वाले चे बाद में कांगो और बोलीविया में गुरिल्ला अभियानों में शामिल हुए। आज क्यूबा एक बार फिर अमेरिकी दबाव का सामना कर रहा है, जहां ट्रंप प्रशासन बदलाव की मांग कर रहा है।
चे ग्वेरा की पकड़ से आज के क्यूबा तक का सफर
Source: Patrika Hindi