संविधान सभा में शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन और सभा के अधिकार के औचित्य व सीमाओं पर विस्तृत बहस हुई थी। एक ओर हिंसा की आशंका थी, दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर असहमति दबाने का जोखिम। डॉ. आंबेडकर ने 25 नवंबर 1949 को कहा था कि संवैधानिक रास्ते खुलने के बाद असंवैधानिक तरीकों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अंततः शांतिपूर्ण सभा को मौलिक अधिकार माना गया, पर उचित प्रतिबंधों के अधीन।
धरना-प्रदर्शन के अधिकार पर संविधान सभा में हुई थी बहस
Source: TV9 Bharatvarsh