श्रीपत राय ने 'कहानी' पत्रिका के जरिए हिंदी कहानी को छायावाद से आधुनिकता की ओर मोड़ा। 1954-57 के बीच उर्दू, पंजाबी, बांग्ला समेत कई भाषाओं की कहानियों के अनुवाद छापे। अज्ञेय, रेणु, सोबती जैसे लेखकों को मंच दिया। वे चित्रकार भी थे और 1963 के टोक्यो बिएनाले में उनकी कृतियां प्रदर्शित हुईं।
श्रीपत राय: हिंदी कहानी को नया व्याकरण देने वाले संपादक
Source: Lokmat Hindi