प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की। विशेषज्ञों के अनुसार, इन अदालतों का प्रदर्शन आम अदालतों से अलग नहीं है—वही जज, वही प्रक्रिया। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, केवल 22% मामलों का निपटारा एक साल में हुआ, जबकि 42% में तीन साल से अधिक लगे। आलोक प्रसन्न कुमार और जस्टिस मुरलीधर ने इसे अस्थायी उपाय बताया।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट: क्या वाकई तेजी से निपटते हैं मामले?
Source: BBC Hindi
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