एक लेख में मनुष्य द्वारा प्रकृति के निरंतर विनाश पर चिंता व्यक्त की गई है। मक्के के दानों की सम संख्या, नारियल का पानी और गिलहरी की भूलने की आदत जैसे उदाहरणों से बताया गया है कि प्रकृति का हर तत्व अपने अस्तित्व के लिए काम करता है, लेकिन मनुष्य ही एकमात्र जीव है जो प्रकृति को नष्ट कर रहा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पेड़ के नीचे सोने के प्रसंग से प्रकृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी गई है।
मनुष्य क्यों बन गया पर्यावरण का हत्यारा?
Source: Lokmat Hindi
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