भारत में गांवों-कस्बों से महानगरों की ओर होता आंतरिक पलायन अब 'साइलेंट माइग्रेशन' बन चुका है, जिससे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहर झुग्गी, जल संकट, ट्रैफिक और प्रदूषण से जूझ रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक 40% आबादी शहरों में होगी। छोटे शहरों का युवा नेतृत्व और उद्यमशीलता कमजोर पड़ रही है। समाधान अवसरों के विकेंद्रीकरण और संतुलित विकास में है।
साइलेंट माइग्रेशन: महानगरों पर बोझ, छोटे शहरों से पलायन
Source: Lokmat Hindi
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