सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के उस कार्यालय ज्ञापन को निरस्त कर दिया, जिससे बिना पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति के शुरू हुई परियोजनाओं को बाद में वैध ठहराने का रास्ता बनता था। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय स्वीकृति एक अनिवार्य कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे प्रशासनिक आदेशों से कमजोर नहीं किया जा सकता। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और सुशासन के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंजूरी के बाद वैधीकरण को खारिज किया
Source: Lokmat Hindi
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