1947 में लाहौर में चौधरी लतीफ़ को पूर्व मालिक हरकिशन दास बेदी का ख़त मिला, जिसमें उन्होंने अपने दस्तावेज़ भेजने की गुज़ारिश की। इस ख़त ने दोनों परिवारों के बीच ऐसा रिश्ता बनाया जो तीसरी पीढ़ी तक ज़िंदा है। यह कहानी विभाजन के दर्द और इंसानियत की मिसाल है।
बंटवारे का दर्द: लाहौर के मकान की कहानी
Source: BBC Hindi