गुजरात के एक क्लर्क और चपरासी को 20 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में 30 साल तक कानूनी लड़ाई झेलनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों को बरी करते हुए कहा कि केवल राशि बरामद होने से दोषसिद्धि सही नहीं ठहराई जा सकती। कोर्ट ने मंजूरी की अनियमितता और गवाह के बयान को भी आधार बनाया।
20 रुपये रिश्वत मामले में 30 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने दो कर्मचारियों को बरी किया
Source: Zee News Hindi