विदेश में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेते समय भारत और होस्ट कंट्री के विकल्पों की तुलना करना जरूरी है। भारत से लोन लेने पर रुपये में रीपेमेंट होता है, जबकि विदेश में नौकरी की योजना बनाने वालों के लिए होस्ट कंट्री का लोन करेंसी रिस्क कम कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सिर्फ ब्याज दर नहीं, बल्कि कुल लागत, कोलेटरल और रीपेमेंट शर्तों पर ध्यान दें।
विदेश में पढ़ाई के लिए कौन सा लोन बेहतर?
Source: Prabhat Khabar