मध्य प्रदेश के खरगोन जिले का कठोरा गांव सामाजिक सद्भाव की मिसाल है, जहां विवाद थाने या अदालत के बजाय चौपाल पर सुलझाए जाते हैं। गांव को 2002 और 2020 में विवादविहीन गांव का सम्मान मिला; 2020 में तत्कालीन सीजेआई शरद अरविंद बोबडे ने ऑनलाइन संवाद कर डिजिटल प्रमाण-पत्र दिया। महिलाएं भी विवाद निपटाने में आगे आती हैं।
नर्मदा किनारे बसा कठोरा गांव, दो बार विवादविहीन सम्मानित
Source: Nai Dunia