शिक्षा क्रांति के दावों के बावजूद यूनिसेफ की रिपोर्ट चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है। करीब 1.2 करोड़ बच्चों को पीने का पानी और लगभग पांच करोड़ स्कूली बच्चों को स्वच्छता व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उच्च शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, पेपर लीक और नकल ने गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, कंप्यूटर और इंटरनेट की कमी तथा दिव्यांग बच्चों के लिए समानांतर व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय है।
शिक्षा क्रांति के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
Source: Dainik Tribune Hindi