विश्व आवास दिवस पर विशेषज्ञों ने चेताया है कि कंक्रीट और सीमेंट पर अत्यधिक निर्भरता जलवायु संकट बढ़ा रही है। रेत उत्खनन से नदियों और भूजल को नुकसान हो रहा है। लेह में कंक्रीट भवन सर्दियों में पांच गुना ऊर्जा खर्च करते हैं। परंपरागत सामग्री जैसे मिट्टी, बांस और चूने को अपनाकर टिकाऊ और किफायती आवास बनाए जा सकते हैं।
आवास निर्माण में स्थानीय पर्यावरण और परंपरागत ज्ञान जरूरी
Source: Lokmat Hindi