श्राद्ध और तर्पण को केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मृति और आत्मचिंतन का अवसर माना जा सकता है। विज्ञान के अनुसार डीएनए पीढ़ियों की जैविक निरंतरता दर्शाता है, जबकि एपिजेनेटिक्स बताता है कि वातावरण और अनुभव जीन की अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तर्पण से डीएनए सीधे बदलने का दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।
श्राद्ध-तर्पण: आस्था, विज्ञान और पीढ़ियों की निरंतरता
Source: Dainik Tribune Hindi