पंजाब में करीब 33 लाख प्रवासी रहते हैं, जिनमें 80-90% उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव न के बराबर है। राजनीति पंजाबियत और सिख पहचान पर केंद्रित होने के कारण ये प्रवासी हाशिए पर हैं। विधानसभा में उनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, और दल उन्हें वोटबैंक नहीं मानते।
पंजाब की राजनीति में प्रवासी वोटर क्यों हैं कमजोर?
Source: NDTV India