देश के 42 पूर्व जजों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों ने खुले पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सबूत गंभीर आरोप लगाए जाने पर चिंता जताई है। पत्र में कहा गया कि संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बार-बार "चोर" या "कठपुतली" कहकर बदनाम करना ठीक नहीं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने "वोट चोरी" के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे दावों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं रखे गए, जिससे लोकतंत्र पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।
42 पूर्व जजों ने संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सबूत आरोपों पर चिंता जताई
Source: Hari Bhoomi