इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म और अपहरण के मामले में 1988 में दोषी ठहराए गए सुभाष की सजा 38 साल बाद रद्द कर दी। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे मामला साबित करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि विचारण के दौरान जमानत पर रहे सुभाष को आत्मसमर्पण की जरूरत नहीं है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 38 साल बाद दुष्कर्म दोषी को बरी किया
Source: IBC24 Hindi