क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में जलवायु परिवर्तन और कमजोर कोल्ड-चेन के कारण हर साल लगभग 13 अरब डॉलर यानी 1.23 लाख करोड़ रुपये के खाद्यान्न का नुकसान होता है। देश में उत्पादित फल-सब्जियों का करीब 40 प्रतिशत और खाद्यान्न का 5-6 फीसदी हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। मजबूत अल नीनो से छह राज्यों में सूखे का असर अब शहरी क्षेत्रों और बाजार तक दिख रहा है।
जलवायु संकट से हर साल 1.23 लाख करोड़ की फसल बर्बाद
Source: Prabhat Khabar