त्योहारी सीजन में मावे, पनीर और मिठाइयों में यूरिया, डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा जैसे जहरीले रसायनों की मिलावट का संगठित धंधा चल रहा है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। एफएसएसएआई और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 मौजूद होने के बावजूद कमजोर अमल और धीमी न्यायिक प्रक्रिया से दोषी बच निकलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुद्ध भोजन को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना है। विशेषज्ञ जहरीली मिलावट को गैर-जमानती अपराध बनाकर फास्ट-ट्रैक कोर्ट और ब्लॉकचेन निगरानी की सिफारिश करते हैं।
त्योहारों में मिलावट पर सख्त कानून की मांग
Source: Dainik Tribune Hindi