2026 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार ऑप्टोजेनेटिक्स पर दिया गया है, जिसमें जेएनयू के प्रोफेसर सुनील कटेरिया का अहम योगदान रहा है। उन्होंने 2000-2004 के दौरान नोबेल विजेता पीटर हेगेमन के साथ पीएचडी करते हुए शैवाल में रोशनी-संवेदनशील प्रोटीन बनाने वाले दो जीन की पहचान की थी। यह खोज दिमाग की कोशिकाओं को रोशनी से नियंत्रित करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
नोबेल पुरस्कार से जुड़ी खोज में जेएनयू प्रोफेसर का योगदान
Source: NDTV India